AI समिट में रोबोडॉग विवाद: प्रो नेहा सिंह का सफर और सीख

AI समिट में रोबोडॉग विवाद: प्रो नेहा सिंह का सफर और सीख

नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit का मंच तब सुर्खियों में आया जब गैलगोटियास यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर रखा रोबोटिक कुत्ते यानी रोबोडॉग से जुड़ा विवाद बढ़ गया। सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की खबरों तक, इस प्रोजेक्ट को लेकर उठने वाले सवालों ने आयोजन का माहौल गर्म कर दिया। इसी बीच प्रोफेसर नेहा सिंह कैमरे के सामने आई और उनके बयानों ने जनता का ध्यान खींचा।

प्रोफेसर नेहा सिंह गैलगोटियास यूनिवर्सिटी के School of Management में कम्युनिकेशन विभाग की फैकल्टी मेंबर हैं। इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से B.Com की डिग्री हासिल करने के बाद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से MBA किया। शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा और GITAM में इनके शिक्षण अनुभव के अलावा Career Launcher में वर्बल एबिलिटी का मेंटर रहना भी इनके पेशेवर सफर की खासियत है। नवंबर 2023 से इनका जुड़ाव गैलगोटियास यूनिवर्सिटी से हुआ और उनका लिंक्डइन प्रोफाइल फिलहाल “open to work” दिखा रहा है, जिसने भी उन्हें खोजा, ये बात ध्यान में आई।

समिट में रोबोट कुत्ते की उत्पत्ति और तकनीकी विवरण पर जब प्रश्न उठे, तो यूनिवर्सिटी ने स्थिति साफ की कि जानकारी में त्रुटि से भ्रम हुआ। उन्होंने माना कि जो प्रतिनिधि जानकारी दे रही थीं, वे तकनीकी पहलुओं की गहन समझ नहीं रखती थीं। प्रोफेसर नेहा ने PTI से कहा कि उनका उद्देश्य रोबोडॉग को पूरी तरह से स्वदेशी बताने का नहीं था, बल्कि उत्साह और तेज गति से बोलने के कारण संदेश में अस्पष्टता रह गई। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में स्पष्टता पर विशेष ध्यान देने का वादा किया।

इस घटना ने शिक्षा और AI पर काम करने वाले विशेषज्ञों के सामने कुछ सबक रखे हैं। सबसे पहले, स्पष्टीकरण की कमी से कैसे सूचना का गलत चित्र सामने आ सकता है, यह दिखा। दूसरे, सार्वजनिक मंच पर संवाद करने वाले शिक्षाविदों को तकनीकी तैयारी के साथ-साथ संचार कौशल पर भी पैनी नजर रखनी चाहिए। अंत में, यह विवाद इस बात का उदाहरण है कि युवा शिक्षाविद और शोधकर्ता अपने क्षेत्र में अवसर तलाशते समय किस तरह से अपनी विश्वसनीयता बनाए रख सकते हैं।

निष्कर्षतः, AI Impact Summit के इस रोबोटिक्स विवाद से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा एवं तकनीकी प्रदर्शन में पारदर्शिता अनिवार्य है। प्रोफेसर नेहा सिंह की सहज माफी और आत्ममूल्यांकन ने बताया कि गलती स्वीकार करना भी एक सशक्त संदेश है। भविष्य में ऐसे आयोजनों से बेहतर तैयारी और जिम्मेदार संवाद की उम्मीद रहेगी, जिससे तकनीकी नवाचार और शिक्षा का सामंजस्य मजबूत होगा।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *