उम्र की पाबंदियों को तोड़ते हुए: 74 में IIT दिल्ली से PhD पूरी की चंद्रशेखर प्रसाद

उम्र की पाबंदियों को तोड़ते हुए: 74 में IIT दिल्ली से PhD पूरी की चंद्रशेखर प्रसाद

कहते हैं सीखने की कोई सीमा या उम्र नहीं होती, और चंद्रशेखर प्रसाद (74) ने इस भाव को पूरी तरह आत्मसात किया है। बिहार के निवासी और पूर्व केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के निर्माण महानिदेशक रहे चंद्रशेखर प्रसाद ने रिटायरमेंट के बाद नई चुनौती अपनाई और आईआईटी दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग में PhD from IIT Delhi after retirement की डिग्री हासिल कर दी।

अपनी सरकारी सेवा में कई बड़े पुल, सड़क और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व करने के बाद, चंद्रशेखर ने सोचा कि ज्ञान का भूख कभी नहीं बुझती। रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने रिसर्च की दुनिया में कदम रखा और रिटायरमेंट के बाद आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की राह पर चल दिए। इस सफर में उन्होंने तकनीकी चुनौतियों का सामना किया और नए शोध विषयों को समझने में जुट गए।

आईआईटी दिल्ली में उनके शोध का फोकस टिकाऊ निर्माण सामग्री और आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीकों पर था। ग्यारहवीं आईआईटी दिल्ली दीक्षांत समारोह में जब उन्होंने अपना पर्चा जमा किया, तो शिक्षक और जूनियर साथियों ने उनके जज़्बे को सलाम किया। iit delhi convocation के मंच पर उनके चेयर प्रोफेसर ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह उपलब्धि IIT दिल्ली समाचार में सुनहरी मिसाल बनकर उभरी।

चंद्रशेखर प्रसाद का नाम वहीं रुकता नहीं: वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के nitish kumar batchmate chandrashekhar prasad भी रह चुके हैं। कॉलेज के दिनों से दोनों की दोस्ती और एक-दूसरे के प्रेरणा स्रोत बनने की कहानी आज भी चर्चा में है। इस वाकये से साबित होता है कि सीखने का जज़्बा जीवनभर जीवंत रह सकता है, चाहे आयु कोई भी हो।

निष्कर्षतः चंद्रशेखर की यह यात्रा हम सभी के लिए एक सीख है कि रुका हुआ मन आगे बढ़ने से रोक नहीं सकता। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि आईआईटी दिल्ली की सीख हम परंपरागत सीमाओं को पार करने की हिम्मत दे सकती है। ऐसे उदाहरण युवा और वरिष्ठ दोनों को यह याद दिलाते हैं: ज्ञान की अलख बुझने नहीं देती, बस प्रयास निरंतर होना चाहिए।

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