इच्छाशक्ति की जीत: दिव्यांग छात्र भागीरथ सिंह ने 12वीं में पाया 100%

इच्छाशक्ति की जीत: दिव्यांग छात्र भागीरथ सिंह ने 12वीं में पाया 100%

राजस्थान बोर्ड की 12वीं साइंस परीक्षा में बीकानेर के छात्र भागीरथ सिंह ने 100% अंक हासिल करके एक मिसाल कायम की है। शारीरिक रूप से दोनों हाथ न होने के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास और मेहनत से पूरे राज्य में अपनी पहचान बनाई। यह सफलता केवल अंक तालिका तक सीमित नहीं, बल्कि दृढ़ निश्चय और सपनों को साकार करने की प्रेरणा भी है।

भागीरथ को बचपन से ही शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके परिवार ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। पिता रामनारायण सिंह ने छोटी-छोटी उपलब्धियों को भी उत्साह के साथ सराहा और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। चाहे किसी विषय का कठिन प्रश्न हो या आम दिनों की बाधा—हर मुश्किल को उन्होंने मिलकर पार किया।

पढ़ाई के दौरान भागीरथ ने स्वयं के अनूठे तरीकों से नोट्स तैयार किए और सहयोगी की मदद से सवाल हल किए। उन्होंने कड़ी मेहनत के साथ डिजिटल संसाधनों का सहारा लिया और नियमित परीक्षा पूर्व अभ्यास शुरू कर दिया। इस दौरान उनकी रणनीति, समय प्रबंधन और आत्म-अनुशासन ने उन्हें एक अलग मुकाम तक पहुंचाया।

उनकी उपलब्धि न सिर्फ निजी सफल्ता का प्रतीक है, बल्कि पूरे समाज के लिए सीख है कि अधिकार और अवसर समान रूप से मिलने चाहिए। स्कूल अधिकारियों, शिक्षकों और साथियों के सहयोग ने यह साबित किया कि सकारात्मक माहौल में कोई भी बाधा असंभव नहीं रहती। भागीरथ की कहानी समावेशी शिक्षा के महत्व को उजागर करती है और अन्य दिव्यांग छात्रों को भी हौसला देती है।

निष्कर्षतः भागीरथ सिंह का सफर हमें यही संदेश देता है कि अगर इरादा पक्का हो तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं। उनकी सफलता यह दिखाती है कि दृढ़ निश्चय, परिश्रम और परिवार-समाज के सहयोग से हर बाधा को पार किया जा सकता है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा है कि स्वयं पर भरोसा रखें और अपनी क्षमता को पहचानकर सपनों को सच करें।

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