बस्ती न्यूज़ की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, अब जिले के किसानों को रासायनिक खाद और बीज मिलने के लिए जरूरी पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना फार्मर रजिस्ट्री के न तो कोटेदारों से खाद खरीदी जा सकेगी और न ही सरकारी अनुदानित बीज मिलेंगे। इस निर्णय से बस्ती में कृषि रसद प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी तो किसानों को भी सीधे लाभ हो सकता है।
सरकारी तंत्र ने किसान रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों माध्यम से शुरू किया है। इसमें आधार कार्ड व जमीन का रिकॉर्ड देना अनिवार्य होगा। 15 अप्रैल तक फार्मर रजिस्ट्री फॉर्म भरे जाने की आखिरी तारीख रखी गई है। यदि कोई किसान इससे चूक गया तो बस्ती news today के मुताबिक उसे आगामी सत्र के लिए खाद और बीज की सब्सिडी नहीं मिलेगी।
हमारा विश्लेषण यह दर्शाता है कि यह कदम भ्रष्टाचार और कालाबाजारी को रोकने में मददगार हो सकता है। बहुत से किसान नकली लाभार्थी बनाकर सरकारी संसाधन का दुरुपयोग करते आए हैं। पंजीकरण से असली किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी। हालांकि तकनीकी अड़चन या सरकारी कैंटीन में लंबी कतारों की जिम्मेदारी भी अधिकारियों पर होगी।
बस्ती समाचार में सामने आया है कि ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमज़ोर है, जिससे फार्मर रजिस्ट्री में देरी हो सकती है। ऐसे में ब्लॉक कार्यालयों में मोबाइल रजिस्ट्रेशन कैम्प लगाकर किसान सहयोगी टीमें भेजना जरूरी होगा। साथ ही संवाद के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाने चाहिए कि समय पर रजिस्ट्रेशन करवा लें।
निष्कर्षतः बस्ती के किसानों को इस नए नियम को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए। ये परिवर्तन लंबी अवधि में कृषि संसाधनों की न्यायसंगत उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और दाम घटाकर उत्पादन लागत में इजाफा करेगा। अगर किसान समय रहते रजिस्ट्रेशन कराते हैं, तो उन्हें खाद-बीज की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।

