बरेली के राम मोहन मेमोरियल पब्लिक स्कूल के सभागार में दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड के स्थापना दिवस का समारोह भव्य तरीके से आयोजित किया गया। इस आयोजन ने स्थानीय श्रमिकों और कर्मचारियों को एक मंच प्रदान किया, जहां वे अपनी सामाजिक-आर्थिक उन्नति के मार्ग पर कदम बढ़ाने के प्रेरक संदेशों से रूबरू हुए।
समारोह का शुभारंभ जनार्दन सिंह यादव, निदेशक जन शिक्षण संस्थान, बरेली एवं क्षेत्रीय सलाहकार समिति सदस्य, ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। उनके विचारों ने यह दर्शाया कि शिक्षा और प्रशिक्षण से ही मजबूत मजदूर वर्ग का निर्माण संभव है। यादव ने कहा कि निरंतर सीखने की भावना आधुनिक परिप्रेक्ष्य में श्रमिकों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी।
अपने संबोधन में बलवीर सिंह, शिक्षा अधिकारी बरेली, ने बोर्ड की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संगठित, असंगठित और ग्रामीण क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के लिए चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं का ब्यौरा दिया। सिंह ने बताया कि इन पहलों से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर मैंने देखा कि सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ठोस रणनीति तैयार की जा रही है, जो श्रमिकों के अधिकारों व कौशल विकास को प्राथमिकता देती है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की साझेदारी से चल रहे ये प्रोजेक्ट्स, जैसे कि कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता अभियान, दीर्घकालिक रूप में स्थायी परिवर्तन लाने का सामर्थ्य रखते हैं। ऐसे आयोजनों से श्रमिकों में आत्मविश्वास जगता है और सामाजिक समावेश को बल मिलता है।
संक्षेप में, इस स्थापना दिवस ने यह संदेश दिया कि श्रमिक शिक्षा केवल एक औपचारिक पहल नहीं, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास का आधार है। आने वाले समय में इन कार्यक्रमों को और व्यापक रूप देना, क्षेत्रीय सहूलियतों के अनुरूप ढालना तथा उद्योगों के साथ तालमेल स्थापित करना अत्यंत आवश्यक होगा। यही वह रास्ता है जो हमारे श्रमबल को नए अवसरों की ओर ले जाएगा।

