शहर से मुक्त सरसों बेचकर अपने गांव निगोही लौट रहे साथी सचिन (25) और भूपेंद्र की मंगलवार रात को डीग-बरई मार्ग पर अनहोनी की जद में आ गई। रेलवे फाटक से थोड़ी आगे पिकअप गाड़ी को टकराने से बचाने के चक्कर में उनका ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित हो गया और पलटकर दोनों नीचे गिर गए। इस दर्दनाक हादसे में सचिन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि भूपेंद्र गंभीर रूप में घायल हो गया।
डीग चिकित्सालय पहुंचे प्राथमिक इलाज के दौरान डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सचिन की मृत्यु की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे में गंभीर चोटों के कारण उनकी बचत असंभव थी। घायल भूपेंद्र को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर देखभाल के लिए आगे रेफर किए जाने की तैयारी है। खोह थाने के एएसआई जयसिंह भी अस्पताल पहुंचकर मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने तथा प्रशासनिक कार्रवाई कराने में जुटे हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, दोनों युवक सरसों बेचकर साढ़े सात बजे डीग से वापस अपने गांव की ओर आ रहे थे। रात होने के कारण सड़क पर विजिबिलिटी कम थी और रेलवे फाटक पर बत्तियां बंद पाई गईं। इस स्थिति में अचानक पिकअप के करीब आने पर ट्रैक्टर चालक ने बचाव की कोशिश में खुद को संतुलन खो दिया और भारी ट्राली पलट गई।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि अंधेरे में सही संकेतों के अभाव और आवागमन के नियमों की अनदेखी किस प्रकार जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी, खराब सड़कों पर तेज रफ्तार वाहन और अनियंत्रित ड्राइविंग ऐसे हादसों के प्रमुख कारण बन रहे हैं। दुर्घटना प्रभावित परिवारों की मदद के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों को भी सतर्क रहकर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।
अंततः सचिन की अकाल मृत्यु हम सभी के लिए चेतावनी है कि जीवन बचाने की जल्दबाजी में अधिक सावधानी बरतना जरूरी है। बेहतर सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, उचित प्रकाश व्यवस्था और ट्रैफिक नियमों का पालन ही भविष्य में ऐसी अनचाही त्रासदियों को रोक सकता है। सचिन के परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए हम सबको सड़क सुरक्षा के प्रति सचेत रहने का प्रण लेना चाहिए।

