उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से अभी-अभी आई खबर ने एक बार फिर से स्थानीय कानून व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। बीती शाम अज्ञात हमलावरों ने भाजपा पार्षद के परिवार पर अचानक फायरिंग कर दी, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई। इस वारदात ने जहां लोगों के रौंगटे खड़े कर दिए, वहीं सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर कर दिया।
घटना स्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। पार्षद का परिवार नजदीक के एक होटल में मौजूद था और इसी दौरान हमलावरों ने निशाना साधा। गोलीबारी में पार्षद के ड्राइवर और एक रिस्तेदार घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने तुरंत जगह पर पहुंचकर सुराग जुटाने शुरू कर दिए।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे ने घटना की जांच तेज कर दी है। वरिष्ठ अधिकारियों ने फोरेन्सिक टीम को बुलाकर फायरिंग की बुलेट रिकनस्ट्रक्शन करवाई, जबकि बाजार में लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। राजनीतिक दलों ने इस हमले को गंभीरता से लिया है और दोषियों को तुरंत पकड़ने की मांग उठाई है।
मेरी नज़र में, यह घटना केवल एक राजनीतिक हमला नहीं बल्कि कानून व्यवस्था में मौजूदा खामियों का आईना है। मेरठ जैसे शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजामों में और पारदर्शिता लाने की सख्त जरूरत है। अगर त्वरित कार्रवाई और पकड़े गए आरोपियों को उचित सजा नहीं मिली तो भविष्य में ऐसी वारदातें बढ़ने का खतरा रहेगा।
निष्कर्षतः, भाजपा पार्षद के परिवार पर हुई इस बर्बर फायरिंग ने न्यायिक प्रक्रिया की जवाबदेही और प्रशासनिक तत्परता पर गहरा असर डाला है। आमजन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, तभी लोकतंत्र और नागरिक विश्वास को मजबूती मिलेगी। उम्मीद करते हैं कि जांच टीम जल्द दोषियों को कानूनी रौशनी में ला कर जवाबदेही तय करे और मेरठ फिर से सुरक्षित शहर के रूप में उभरे।

