उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में शादी के एक समारोह ने अचानक रहस्योद्घाटन का रूप ले लिया जब दूल्हा अत्यधिक नशे की हालत में विवाह स्थल पर पहुंचा। उज्ज्वल अरमानों से सजी बहार की जगह बची-खुची उदासी रही, क्योंकि शराब के चलते यह विवाह पूरी नहीं हो सका।
बारात का जुलूस तय समय पर दूल्हे के घर पहुंचा, लेकिन मिलन स्थल पर पहुंचकर सबको बड़ी निराशा हुई। दूल्हा ज़ोर ज़ोर से हँसते हुए अचेत हो गया और रिश्तेदारों ने समझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन जब सुध नहीं आई तो परिवारकारों ने आखिरकार बारात को वापस भेजने का फैसला लिया।
यह घटना केवल एक असफल विवाह का द्योतक नहीं, बल्कि समाज में बढ़ रहे अल्कोहल के दुष्परिणामों का भी चिंताजनक उदाहरण है। शादी को जीवन के पवित्र बंधन के रूप में देखा जाता है, लेकिन जब नशे की आदतें उस पवित्रता को धुंधला कर दें, तो न सिर्फ दो परिवारों का अपमान होता है, बल्कि सामाजिक खामियाँ भी उजागर होती हैं।
मेरी नजर में यह घटना हमें कई सबक सिखाती है। सबसे पहली ज़िम्मेदारी तो स्वयं दूल्हे पर थी कि वह होश में रहकर इस महोत्सव में शामिल होता। दूसरी, परिवार और मित्रों को चाहिए कि वे नशे पर नियंत्रण और समय पर चेकिंग से ऐसी परिस्थितियों को टालें। साथ ही समाज को जागरूकता फैलाकर शराब के नशे के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
अंततः यह अनुभव हमें याद दिलाता है कि शादी सिर्फ रस्मों का सिलसिला नहीं, बल्कि जीवनभर निभाया जाने वाला विश्वास और ईमानदारी का वचन है। नशा चाहे जितना भी तर्कसंगत बहाना दिखे, असली उत्सव तब ही कायम रहेगा जब सभी शरारती तत्वों से दूर रहकर प्रेम और सम्मान के साथ कदम आगे बढ़ाए जाएँ।

