जीवन में सीखने की चाहत कभी कम नहीं होती और पटना के 74 वर्षीय चंद्रशेखर प्रसाद ने इसका ज्वलंत उदाहरण पेश किया है। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली के सख्त अकादमिक माहौल में प्रवेश लिया और सिविल इंजीनियरिंग में PhD से अपनी यात्रा को नई ऊँचाई दी। इस रोमांचक सफर ने साबित कर दिया कि रिटायरमेंट के बाद आईआईटी दिल्ली से पीएचडी लेने का सपना भी हकीकत में बदल सकता है।
चंद्रशेखर प्रसाद लंबे समय तक केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) में निर्माण महानिदेशक के पद पर रहे। वहीं उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ भी पढ़ाई की थी, जिससे वे नीतीश कुमार बैचमेट चंद्रशेखर प्रसाद के रूप में जाने जाते हैं। उनके अकादमिक और प्रशासनिक अनुभव ने उन्हें शोध के क्षेत्र में मजबूती से खड़ा किया, जहां उन्होंने नई तकनीकों और नवाचारों पर काम किया।
उनकी पीएचडी थीसिस का विषय पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री से जुड़ा था, जो देश में अक्षय ऊर्जा और टिकाऊ विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इस दौरान आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसरों और शोध सहयोगियों का मार्गदर्शन सहायक रहा। 2024 के IIT Delhi Convocation में उन्हें डॉ. की उपाधि तक पहुंचने की खुशी मिली, जिसने पूरे संस्थान में जश्न का माहौल बना दिया।
चंद्रशेखर प्रसाद की इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का मार्ग जीवन भर खुला रहता है। चाहे पढ़ाई की शुरुआत जवानी में हो या बुजुर्गों की पीढ़ी में, phd from iit delhi after retirement के उदाहरण युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों दोनों को प्रेरित करते हैं। आईआईटी दिल्ली की यह पहल सीखने के अवसरों का विस्तार करने और अनुभवों को सम्मानित करने में महत्वपूर्ण साबित होती है।
निष्कर्षतः चंद्रशेखर प्रसाद की कहानी बताती है कि सीखने का कोई उम्र सीमा नहीं होती। उनका संघर्ष और दृढ़ संकल्प हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को कभी अधूरा नहीं छोड़ना चाहता। इस उपलब्धि से न सिर्फ उन्हें व्यक्तिगत संतोष मिलता है, बल्कि समाज में आत्मविश्वास और आत्मगौरव का भी संचार होता है।

