राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) ने 17 अगस्त 2026 को जारी आदेश के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2022-23 से तीसरे वर्ष के BHMS में Competency Based Dynamic Curriculum (CBDC) लागू करने का मार्गदर्शन प्रस्तुत किया है। इस निर्देश का उद्देश्य होम्योपैथी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल-केंद्रित एवं परिणामोन्मुख बनाने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। सभी विश्वविद्यालयों, होम्योपैथिक बोर्डों और शिक्षण संस्थानों को नये पाठ्यक्रम का समयबद्ध तरीके से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
CBDC के अंतर्गत पारंपरिक सिद्धांतों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों के साथ जोड़ा जाएगा। इसमें होम्योपैथिक पदार्थ-विज्ञान, चिकित्सा दर्शन एवं नैदानिक हस्तक्षेपों की संगठित पढ़ाई होगी, जिससे छात्र विषय को सिर्फ सिद्धांत तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि वास्तविक मरीजों पर जांच, केस-शोध और समूह अन्वेषण के माध्यम से गहन अनुभव प्राप्त करेंगे। पाठ्यक्रम में सिमुलेशन लैब, वर्कशॉप एवं इंटरएक्टिव सेमिनार भी शामिल होंगे, जो आत्मविश्वास बढ़ाने और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान सिखाने में मदद करेंगे।
नए मॉड्यूल में केस-बेस्ड लर्निंग, सामुदायिक स्वास्थ्य परियोजनाएं तथा औद्योगिक दृष्टिकोण से प्रेरित फैकल्टी ट्रेनिंग शामिल है। इससे विद्यार्थियों को अस्पताल, क्लिनिक और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में अनुप्रयोग के स्तर पर अभ्यास करने का अवसर मिलेगा। पूर्व के लेखन-आधारित मूल्यांकन के बजाय अब प्रदर्शन परीक्षण, प्रस्तुतीकरण एवं टीम परियोजना के जरिये उनकी क्षमता का आंकलन होगा। इस बदलाव से होम्योपैथिक चिकित्सकों की व्यावहारिक दक्षता में सुधार आने की उम्मीद है।
मेरी नजर में यह कदम वैश्विक स्वास्थ्य शिक्षा के रुझानों के अनुकूल है, जहां कौशल परक प्रशिक्षण को अभिन्न अंग माना जाता है। हालांकि, समुचित अवसंरचना, प्रयोगशाला सुविधाएं और शिक्षकों के विशेष प्रशिक्षण की बाधाएं सामने आ सकती हैं। इन्हें दूर करने के लिए संस्थानों को चरणबद्ध योजना और निरंतर मूल्यांकन प्रणाली अपनानी होगी। यदि समयबद्ध रूप से संसाधन जुटाकर इन चुनौतियों से निपटा गया, तो होम्योपैथी क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सीय सेवाएं सुदृढ़ होंगी।
निष्कर्षतः, तीसरे वर्ष के BHMS में CBDC के लागू होने से विद्यार्थियों की व्यावहारिक समझ और कौशल क्षमता दोनों में वृद्धि संभव है। यह परिवर्तन न सिर्फ शिक्षकों-अनुभवियों के दृष्टिकोण को नया आयाम देगा, बल्कि आने वाले समग्र स्वास्थ्य ढांचे को भी अधिक सक्षम बनाएगा। इस नए माड्यूल की सफलता के लिए सभी हितधारकों का सहयोग और प्रतिबद्धता अनिवार्य है।

