राज्य शिक्षा विभाग (DPI) और SCERT की रिपोर्टों में खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ में करीब 85 हजार ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने पिछले वर्षों में बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा) के सेवा में योगदान दिया। इन कर्मियों ने गांव-देहात से लेकर शहरी इलाकों तक रोज़गार करते हुए शिक्षा के मोर्चे पर अहम भूमिका निभाई, लेकिन अब उन्हें टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इनसेवारत शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने रायपुर समाचार परिचर्चा में यह तर्क दिया कि पुराने अनुभव और सेवा रिकॉर्ड को अनदेखा करते हुए नियमित टीईटी की बाध्यता से तकलीफ़ें बढ़ेंगी। इसलिए वे CG Inservice Teacher Special TET की मांग कर रहे हैं, ताकि इन अनुभवी शिक्षकों को जांच-पड़ताल और परीक्षा की नई चुनौतियों के बीच उचित मौका मिल सके।
दूसरे राज्यों में इन-सरिस्का शिक्षक विशेष टीईटी मॉडल को लागू किया जा चुका है, जहां अनुभव के हिसाब से प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं और पारदर्शी समय सारिणी जारी होती है। इस दृष्टिकोण से प्रदेश में भी उम्मीद जगी है कि DPI SCERT CG TET Update के तहत एक अलग कोचिंग कार्यक्रम और पेपर पैटर्न छत्तीसगढ़ के संदर्भ में तैयार होगा। इससे नियम में विघटन नहीं होगा और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
हमारे विश्लेषण में साफ दिखता है कि समयबद्ध तैयारी और एकीकृत पाठ्यक्रम को देखते हुए CG News रिपोर्टों में उठाई जा रही मांग न्यायोचित है। संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और केदार जैन जैसे शिक्षक नेता निरंतर इस विषय पर अधिकारियों से चर्चा कर रहे हैं। ये सभी रायपुर News कवरेज के जरिए यह संदेश दे रहे हैं कि सेवा में लगे शिक्षकों की योग्यता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए, लेकिन उनके अनुभव को भी महत्व देना ज़रूरी है।
निष्कर्षतः यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा मांग कर रहा है कि सेवारत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी की व्यवस्था हो, जिससे शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता भी बरकरार रहे और अनुभवी शिक्षक भी सम्मानजनक तरीके से पात्रता साबित कर सकें। उम्मीद है कि सरकार जल्द निर्णय लेकर इस संकट का समाधान प्रस्तुत करेगी।

