देहरादून के राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में हाल ही में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल द्वारा राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य पूर्व निर्धारित गतिविधियों का आकलन करना, चुनौतियों की पहचान और प्रभावी रणनीतियों को मूर्त रूप देना था। एनएसएस के स्वयंसेवकों और प्रशिक्षकों ने मिलकर उत्तराखंड के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सेवा प्रयासों को और संगठित बनाना तय किया।
बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान और महिला सशक्तिकरण पर कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं। अन्य राज्यों में चल रहे मॉडल की भी समीक्षा की गई, ताकि उत्तराखंड में सफलता के सर्वोत्तम उदाहरणों को अपनाया जा सके।
उत्तराखंड की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए, एनएसएस ने स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता दी। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया। वहीं मैदानी इलाकों में तकनीकी शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और स्वरोजगार की योजनाओं पर बल दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।
मेरी दृष्टि से इस समीक्षा बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसमें सभी हितधारकों—सरकारी अफसर, शिक्षाविद, स्वयंसेवक और स्थानीय समुदाय—ने मिलकर एक साझा रोडमैप तैयार किया। इससे न केवल कार्यक्रमों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि स्वदेशी समाधान विकसित करने की दिशा में भी बढ़ावा मिलेगा। भविष्य में एनएसएस के प्रयासों को और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर स्थानीय फीडबैक और नेतृत्व विकास पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्षतः, राष्ट्रीय सेवा योजना की यह समीक्षा बैठक उत्तराखंड में युवा ऊर्जा को दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। जब तक समर्पित युवा हाथ से हाथ मिलाकर काम करेंगे, तब तक समाज के सशक्त निर्माण और सतत प्रगति की राह आसान होगी।

